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शहीदों के विचार…

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bhagat_singh_1929_140x190आज शहीद सरदार भगत सिंह का 110वां जन्मदिवस है – एक तरीक़े से, आज शहीद उत्सव है।

मैं आपसे शहीद भगत सिंह का उनके अंतिम समय का एक कथन
बाँटना चाहता हूँ; ना जाने क्यों आज मुझे यह बहुत याद आ रहा है –

“ऊषा काल के दीपक की लौ की भांति बुझा चाहता हूँ। इससे क्या हानि है जो ये मुट्ठी भर राख विनष्ट की जाती है। मेरे विचार विद्युत की भांति आलोकित होते रहेंगे…”

कितना गंभीर और निश्छल, परन्तु सत्य वचन है; और इतिहास इस बात का साक्षी है कि उनके विचार आज भी हमें आलोकित करते है…

आईये, आज सोचें कि क्या हमारे आचरण में, विचारों में इतना तेज है कि वो हमारे जाने के बाद भी याद किये जायेंगे और लोग उनका अनुसरण करेंगे?

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Written by RRGwrites

September 27, 2016 at 11:01 AM

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