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On life…and learning

आओ, हम कुछ बदलें…

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Dilli

आज बड़े दिनों के बाद एक पुराने मित्र से बात हुयी। हम बचपन में साथ में पढ़ते थे। बाहरवीं के बाद वो देश से बाहर चला गया, पढ़ाई पूरी की, वहीं नौकरी कर ली। देश आता-जाता रहा, पर पिछले 15 सालों से दिल्ली में समय नहीं बिताया। बस, अभी कुछ दिन हुए, अपनी कंपनी के एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक साल के लिए दिल्ली आया है।

उसने दुनिया घूमी है, और कुछ तीन महीनों से दिल्ली में रहता है। खूब बातें हुयीं, कई पुरानी यादें ताज़ा हुयी। कुछ यूँही ख्याल आया, मैं पूछ बैठा, “अमां यार, बड़ी दुनिया घूम आये, कई छोटे-बड़े शहर देख डाले तुमने। ये तो बताओ कि दिल्ली कैसी लगी?”

“अच्छी है, भाई, बहुत बढ़िया। जो सुनते थे, उससे बेहतर ही है कुछ मायनों में”, उसने कहा।

“तो फिर ये कहो कि वो क्या पांच चीज़ें बदल जाएँ यहाँ तो ये शहर दुनिया के उम्दातरीन शहरों में शामिल हो जायेगा?”, मैंने कुरेदा।

जो जवाब दिया उसने, वो आप सब से बाँटना चाहता हूँ:

  1. राह-चलती महिलाओं को इतना तो मत घूरो यार; ये तो यहाँ बहुत ही ज्यादा होता है!

  2. रेड-लाइट होने पर लोग-बाग़ रुकने लगें, तो जान-में-जान आये।

  3. तुम लोग अपने कार, स्कूटर-मोटरसाइकिल चलाते हुये या उनमे बैठे हुए दूसरी गाड़ियों के अन्दर क्यों झांकते रहते हो?

  4. डस्टबिन न मिले तो टॉफ़ी, पान-मसाला खा के रैपर जेब में रख लो; सड़क पर तो न फेंको।

  5. ऑटो वाले मीटर से चलने लगें, तो क्या बात है! और कृपा कर के कहीं जाने के लिए सवारी को मना तो न करें।

फिर वो बोला, “यार, कमियाँ तो सब देशों और शहरों में हैं; पर हमें तो अपने आस-पास को बेहतर बनाने के बारे में सोचना, करना चाहिए, नहीं?”

फ़ोन रखने के बाद मैंने सोचा, क्या सही बात है। ये वो आदमी है जो सिर्फ तीन-चार महीनो से यहाँ पर है, ये सब महसूस और देख चुका है; और दिल्ली के इस स्वरुप के बारे में चिंतित है। नहीं कह सकता कि इन पांच बदलावों में ऐसा क्या है जो हम दिल्लीवाले नहीं जानते, या अपने घरों में बैठे हुए इनके बारें में शिकायत नहीं करते। शायद रोज़ ही घरों और दफ्तरों में हम इस बारें में बातें किया करतें हैं। पता नहीं क्यों, फिर भी ये पाँचों चीज़े ठीक नहीं होती हमारे आस-पास…

इस उम्मीद में आपसे साझा कर रहा हूँ कि आप खुद भी सोचेंगे और अपने करीबियों को भी बतायेंगे। कुछ तो बदलेगा, ये विश्वास है…

आप दिल्ली में ऐसा क्या बदलना चाहेंगे, जो आपके-मेरे हाथ में है?

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Written by RRGwrites

August 25, 2013 at 7:03 PM

2 Responses

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  1. Reblogged this on RRGwrites and commented:

    The Magical City of Delhi…

    RRGwrites

    October 25, 2014 at 2:16 AM

  2. Rishi ji,
    you didn’t mentioned ur frend’s name?

    deepika singh

    October 28, 2014 at 12:43 PM


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